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मेरे अल्फाज़

बेखौफ घूम रहे हैं इस समाज में ऐसे दरिंदे

Vipin Dilwarya

71 कविताएं

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बेखौफ घूम रहे हैं
इस समाज में ऐसे दरिंदे
देश को हुक्मरानों को ये बताना है
नहीं घूम सकती आज भी
बहन , बेटियां जैसे
आसमान में खुले परिंदे
देश के हुक्मरानों को जगाना है
जैसे जलाया है
उन्होंने उस खुले परिंदे को
ऐसे ही उन दरिंदो को जलाना है

By Vipin Dilwarya


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