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मेरे अल्फाज़

आंख उठाकर भी मत देखना मेरे हिन्दुस्तान की ओर

Vipin Dilwarya

72 कविताएं

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नादान है कुछ परिंदे
जो है मेरे पिंजरों से अंजान

जहां से आएगा बच नहीं पाएगा
चाहे धरती हो या आसमान

आंख उठाकर भी मत देखना
मेरे हिन्दुस्तान की और
जान हथेली पर रखते है
मेरे भारत के वीर जवान

हद में रहकर अपनी औकात से बाहर ना हो
यहां हर हिन्दुस्तानी तैयार है देश
के लिए करने को अपनी जान कुर्बान

कतरा - कतरा ख़ून बहाकर
सींचा है इस देश की मिट्टी को
यूं ही नहीं दुनिया में इस तिरंगे की शान

कोई एक धर्म नहीं सब धर्म है
मेरे देश के लिए मरने मिटने को तैयार
इसलिए पूरी दुनिया में है मेरा देश महान


By  Vipin Dilwarya


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