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मेरे अल्फाज़

थोड़ी कठिन थोड़ी आसान

Vineeta Tewari

69 कविताएं

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कोई आहट नहीं कोई हलचल नहीं
जंगलों की तरह दिल बियाबान है

देखता हूं मैं जिन्हें रात में ख्वाब में
वो हमारी मोहब्बत से अनजान है

खिल ना सका एक भी फूल क्यों
बाग मेरी बागबानी से हैरान है

मैं संभल जाऊंगा मैं सुधर जाऊंगा
क्योंकि भीतर इक अच्छा सा इंसान है

आयेगी मेरे हिस्से में भी मन्ज़िले
राह थोड़ी कठिन थोड़ी आसान है

जब रब ने मुझे माफ कर ही दिया
तब क्यों दुनिया के आगे पशेमान है

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