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मेरे अल्फाज़

पत्थर पर प्रीति लिखूंगी

Vineeta Tewari

67 कविताएं

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गीत की नई रीति लिखूंगी
मैं पत्थर पर प्रीति लिखूँगी

लब की खामोशी के भीतर
जीवन का संगीत लिखूंगी

गीत की नई रीति लिखूंगी

जी भरमाया सा रहता है
मैं भंवरे को मीत लिखूंगी

पीले परिधानों को पहने
मैं बसंत को पीत लिखूंगी

विचरण करते हैं तारागण
उस पथ को मैं वीथी लिखूंगी

तन मन सिकुड़ा सा रहता है
उस मौसम को शीत लिखूंगी

जोखिम से जो डर जाएगा
उस नर को भयभीत लिखूंगी

अपनों से जो हार गया है
उसे हार की जीत लिखूंगी

गीत की नयी रीति लिखूंगी

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