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मेरे अल्फाज़

माटी

Vineeta Pundhir

3 कविताएं

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तन है ये माटी का
मन को भी अपने माटी रख

भेजा जैसे कुदरत ने
निश्छल, सुन्दर, असल
रहने दे इसको यूँ ही
ना कोई इसमें मिलावट रख

तन है ये माटी का
मन को भी अपने माटी रख

बैर सब धुल जाएगा
छल-कपट सब मिट जाएगा
होगा हर कोई बंदे तेरा
ना झूठी दिखावट रख

तन है ये माटी का
मन को भी माटी रख


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