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Nari nahi Nadi ho tum

मेरे अल्फाज़

नारी नहीं नदी हो तुम

Vinay Tiwari

3 कविताएं

51 Views
हे नदी 
तुम कमज़ोर न पड़ना,
न घबराना, न ही डरना
तुम्हें कुछ नहीं होगा,
बस ये परिवर्तन का वक्त है,
तुम्हारा अस्तित्व नहीं खत्म हो रहा
बस स्वरूप बदल रहा है
पहले तुम सिर्फ बहती थी,
देखो अब उड़ना भी सीख गयी।

जाओ उड़ जाओ दूर गगन में,
और बन जाओ 'मेघ'
नहीं रिमझिम वाले नहीं,
खूुंखार, डरावने, तवाही वाले
जिसकी गर्जना मात्र से,
लोग भयभीत हो जायें
फिर तुम बरसना वापस इसी धरती पर,
खूब बरसना,
और करना दोस्ती तूफानों से,
फिर ले आना एक तबाही,
सब कुछ बहा ले जाना, कुछ न छोड़ना।
तुम्हें यह तबाही अरावली की श्रेणियों के
उस पार भी लानी होगी।
बेसक तुम गंगा हो,
बन जाना होगा
तुम्हें अदृश्य 'सरस्वती'
जिसका वजूद कभी नहीं खत्म होगा।
तुम पवित्र और पूज्यनीय रहेगी।

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