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मेरे अल्फाज़

राम वंदना

Anonymous User

13 कविताएं

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हम दीन-दुखी, निर्बल, असहाय 
प्रभु माया के अधीन है ।
प्रभु तुम दीनदयाल, दीनानाथ,
दुखभंजन आदि प्रभु तेरो नाम है ।
हम माया के दासी, लोभी, भिखारी,
दुर्जन, दुष्ट, विकारी प्रभु पापी है ।
प्रभु तुम माया के स्वामी, दाता-विधाता,
निर्गुण,निर्विकार, सनातन पुरूष महान हो ।।1।।

हम इन्द्रियों के दासी, भोगी-विलासी,
कामी, आताताई, अग्यानी, दुष्ट मानव है।
प्रभु तुम जितेन्द्रिय, गुणों के स्वामी,
बुद्धिमान, सकल जगत के स्वामी हो।
हम अहंकारी, ईर्ष्यालु, लाभ-हानि,
मान-अपमान में फँसे प्रभु तेरो सेवक है ।
उद्धार करो प्रभु, निस्तार करो प्रभु
हम तेरो माया के अधीन है ।।2।।

हम भक्षक, मन के चंचल,
धरा पे पाप फैलाने वाला प्रभु
अधम-नीच दुराचारी है ।
प्रभु तुम रक्षक, मन के स्थिर,
धरा पे धर्म फैलाने वाला सज्जन
पुरूष महान हो ।
हम पृथ्वीसुत प्रभु तुम पृथ्वीपति प्रभु ,
इस नाते प्रभु हम तेरो बालक है ।
सारे जहां के पिता प्रभु तुम,
निज पुत्रों को कल्याण करो प्रभु!।।3।।

हे रामचन्द्र! गणिका के उध्दारक,
अहल्या के प्रभु तुम निस्तारक ।
हम कलियुग के प्राणी, काम,क्रोध,
मद, व्यसन में फँसे प्रभु तेरो दास है ।
दासों के प्रति प्रभु तेरो करतब बड़़े महान है ।
उध्दार करो प्रभु! निस्तार करो प्रभु!
हम तेरो माया के अधीन है ।।4।।

कवि विकास कुमार


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