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मेरे अल्फाज़

लड़का नहीं होता

Anonymous User

13 कविताएं

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लड़का नहीं होता किसी घर का कुपुत्र
माहौल बनाता उसे संत-असंत ।
मात-पिता का गुण भी होता पुत्र के रक्तों में
इसलिए लड़का अकेला दोषी नहीं होता ।।१।।

कौन कहता है लड़का आज आवारा है,
वो हसीनियों के गलियों में भटकता है ।
आज भी लड़का बनता कवि, दार्शनिक,
लेखक, समाज-सुधारक है ।।२।।

देश की उन्नति में वीरों के श्रेणी में
इन लड़कों का भी नाम आता है ।
जो अपनी जवानी देश की सरहद पे
मातृभूमि की सुरक्षा के लिए लुटा देता है ।
गर्व है अभिमान है हमें देश के इन पुत्रों पे
जो अपनी जिन्दगी देश के नाम कर देता है ।

नमन बार-बार तुम्हें शत् बार नमन,
देश के वीरों-जवान तुम्हें ।।३।।

कवि विकास कुमार


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