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मेरे अल्फाज़

ब्रह्मचर्य

Anonymous User

24 कविताएं

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ब्रह्मचर्य के अभाव में हो रहा युवाओं का पतन ।
अब कौन-सी शिक्षा देती व्यवस्था की
बलात्कार कर रहे है लोग?
पहले तो छहों शास्त्रों का दिया जाता था ज्ञान,
वेदों की संख्या है चार ।
उपनिषद भी पढ़ाया जाता था,
और साथ में पुराणों की शिक्षा भी दिया जाता था ।
इसलिए तो सतयुग, त्रेता, द्वापर में होते थे युवा महान,
वीर्यवान और यशस्वी ।।1।।

कलियुग में भी वेदों की प्रचार-प्रसार में लगे रहें
हमारे ऋषि दयानंद सरस्वती महान ।
सारी जिन्दगी लोक कल्याण में बिता दिये और
लिख गये महान ग्रन्थ सत्यार्थ प्रकाश ।
हम ये नहीं कह सकते कि कलियुग में नहीं हुआ
कोई राम धनुर्धर व कृष्ण-बलराम ।
बिस्मिल, बोस, चन्द्रशेखर, भगत सिंह,
झाँसी है कलियुग के शान ।
जो अपनी सारी जिन्दगी लूटा दी देश की आन ।।2।।

सबसे पीछे है ब्रह्मचर्य का हाथ, दुष्ट-दुराचारी,
कामी पुरूष नहीं आते देश के काम ।
आध्यात्मिकता है सत्पुरूषों का औजार और
इसी बल पे वो लड़ते असत्य के खिलाफ ।
भौतिकवादी, कामी, दुर्जन क्या जाने ब्रह्मचर्य का प्रताप
वो तो खोये रहते है पर इन्द्रियों के संग ।
ब्रह्मचर्य का पालन कोई विरला ही करता है
तब जाके वह आध्यात्मिक रूख पे सत्पुरूष कहलाता है ।
ब्रह्मचर्य का आध्यात्मिक पुरूष का प्राण इसीलिए
तो वो सदा लड़ते रहते है अन्याय के खिलाफ ।।3।।

साधक साधना करते, ब्रह्मचारी करे दिव्य काम,
पंडित वेद-पाठ करें ।
क्षत्रिय करें देश की रक्षा, वेश्य करे व्यापार और
शुद्र करें सेवा ।
पर जो दृढ़-निश्चयी से करें ब्रह्मचर्य का पालन,
वह है सूर्य के समान ।
ब्रह्मचारी देते जहां को कुछ अलौकिक ज्ञान,
और निज प्राण छोड़ते यहीं है सत्पुरूषों की पहचान ।

कवि विकास कुमार


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