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मेरे अल्फाज़

भारत माँ के हालात

Vikash Beniwal

97 कविताएं

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चहुं ओर देखो भारत माँ के बदतर हालात हो गए हैं,
दुर्दशा के प्रकरण दिल में अथाह आघात हो गए हैं|

हर बात में दुनियादारी ढ़ूंढने लगे हर एक दुनियादार हो गये,
दूसरों के इशारों पर नाचने लगे लोग बड़े ही नचार हो गये|

भ्रष्टाचारी,आंतकवादी के प्रतिक्षण नवीनतम् नवाब हो गए हैं,
मोह माया कालपाश साधु,महात्मा के जोश-ए-शबाब हो गए हैं|

रेप,अत्याचार,बलात्कार मामले आम नवल हो गए हैं,
राष्ट्र जनसमुदायों में कूटनीत कुकर्म प्रखर प्रज्वल हो गए हैं|

-विकाश बैनीवाल

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