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मेरे अल्फाज़

प्रेम की परिभाषा

VIGYAN PRAKASH

2 कविताएं

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प्रेम परिभाषित नही किया जा सकता,
तुम्हारी चंद लफ्ज़ो की जंजीरो मे।
ये तो एहसास है,
बनता बिखरता टूटता जुड़ता,
समय के अनुरुप ढलता हुआ।
ख्वाब है दिल का,
जो दिन और रात नही देखता,
अपनी कहानियाँ बुनने को।
उन्मुक्त विचार है,
सीमाओं को लाँघ जाने की,
खूबियों से परिपूर्ण।
एहसास है पूर्णता का
देवत्व जैसे।
पारिभाषित नही किया जा सकता,
इन लिखी हुई चंद लकीरो में।



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