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मेरे अल्फाज़

जब तिरंगा मेरा कफ़न होगा...

VIBHOOTI TRIPATHI

50 कविताएं

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शहादत की राह पर चल चुका हूं मैं
मौत की अब परवाह नही मुझको
अब तो बस इंतजार उस पल का है
जब तिरंगा मेरा कफ़न होगा 
बहुत बेचैन था ये दिल मेरा अब तक
क्यूंकि अब तक जी रहा था खुद के लिए
जब खुद को हवाले कर दिया मादरे वतन पर
तो लगता है कि जन्नत यहीं है यहीं है यहीं है
अब फिक्र नही किसी बात की मुझको क्यूंकि
मेरी रुखशती का पैगाम हर घर तक जायेगा
अब तो बस इंतजार उस पल का है
जब तिरंगा मेरा कफन होगा
वतन से मोहब्बत की कशिश अब समझ पाये
वरना अब तक जी रहे थे मदहोशी में
काश वो पल भी मेरे वतन के काम आ जाते
तो शायद आज तिरंगा मेरा कफन होता

- विभूति गोण्डवी

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