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Makar sankranti specia....

मेरे अल्फाज़

पतंग सा

Vibhanshu Bhashkar

17 कविताएं

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चलो आज फिर अनंत छुएं...
किसी मासूम के मुस्कराहट के लिए

चलो आज फिर हवाओं को चीरें
किसीे मासूम उम्मीदों के लिए

पता है ,अंजाम इसका 
गिरेंगे फिर जमीं पर, बेसुध सा 

तो क्या हुआ ...एक बार और सही 
चलो इस बार फिर दूसरों से लड़ें
मगर दूसरों की ख़ुशी के लिए .....

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