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मेरे अल्फाज़

चार- विचार

veerangna maurya

5 कविताएं

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चार कदम के चार लम्हों में हुईं चार बातें
चार लोग और चार विचार
चारों में था दम
चारों में से कोई न रूकता
सब कहते सबसे आगे हम
चारों बोले चार दिनों में जाना है उस पार
चलते—चलते पहुंचे दिल्ली
देखी चारमिनार
चारों बोले अभी करेंगे— चार जगह को पार
चार नदियां थीं चार समंदर
चार बजे थे यार
चारों पहुंचे चार जगह पर
घूम लिया संसार
भूख लगी और प्यास सताये
भूले सभी विचार
चारों बोले बहुत हो गया
अब घर चल मेरे यार
सबके एक हुये विचार
चार लोग और चार विचार।

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