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मेरे अल्फाज़

वीर शिवा जी

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भारत लूटने वाले को
भेदी ने दिया सहारा था
घर के अंदर दुश्मन थे
बच्चा बच्चा हारा था

राज रियासत बची रहे
कदमों में थे लेट गए
इन गद्दारों के चक्कर में
सैनिक कितने खेत भए

गैरों की गोदी में पलकर
कितनों ने मान को खोया था
लहूलुहान होकर भी मां ने
आजादी का ख्वाब संजोया था

भारत माँ के सपने को
है उसने साकार किया
ध्वजा धर्म का थाम शिवा
गद्दारों को ललकार दिया

बिखरे तिनकों को इक करके
था उसने ही जोड़ दिया
हिम्मत के बल पर उसने
अभेद किले को तोड़ दिया

दुश्मन सर्पों में गरुड़ भांति
औकात दिखाई दी उसने
भारत पर बुरी नजर ना हो
यह बात बताई थी उसने

शोषण कर्ता के सीने पर
था उसने ही पीर दिया
निर्दोषों से उलझने वालों का
था उसने ही सीना चीर दिया

रुद्र काल के भक्त शिवा ने
हां आह्वान था कर डाला
वह महान था हां महान था
सच्चा देश का रखवाला

- नाथ गोरखपुरी

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