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मेरे अल्फाज़

माँ का आँचल

Vandana Sharma

1 कविता

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एक ही दिन काफी नहीं माँ के लिए
क्यों नही हर दिवस माँ को नमन हो
ज़िन्दगी का हर पल उन्ही की देन है
ऋणी उनका हर दिवस और रैन है
दूर रहकर भी सदा है पास मेरे
गंगा सी शीतलता मिली आँचल में तेरे
मत समेटो अथाह सागर अंजुली में
हो नहीं सकती आराधना एक दिन में

वंदना शर्मा

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