काफी दिन बाद

                
                                                             
                            शाखों के मना करने पर भी
                                                                     
                            
वृक्ष ने गिरा दिया था
अपने प्रिय सूखे पत्तों को
जैसा कि उसने हर बार
किया था दर्द के साथ

खिलखिलाती धूप रोज आकर
प्यार से सहलाती थी
उस बूढ़े वृक्ष को औ'
कुछ देर बैठी रहती थी उसके पास

वह छोटा बच्चा जो
सूखे पत्तों से खेलने रोज
वृक्ष की गोद में आता था
आज भी आया था

नजर इधर-उधर घुमाई औ'
वृक्ष को कटवाने की बात
हो रही थी उसकी
किसी के साथ
काफी दिन बाद..

--वंदना अग्रवाल निराली


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8 months ago
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