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मेरे अल्फाज़

तुम मुझे अधूरा छोड़ आई थी

Vaishali Dewangan

2 कविताएं

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तुम मुझे अधूरा छोड़ आई थी
तुम मुझे अधूरा छोड़ आई थी,
अब मैं पूरा होने आ गया और फिर चंद तुझे देखकर
शर्मा गया।।

मेरा खुले किताब सा दिल बेताब हो गया था,
तलब तो बहुत थी तुझसे मिलने की पर क्या करू मैं
रास्ते मे ग़ुमराह हो गया।।

अक्सर कोसा करता था ख़ुद को,वजह पूछा करता था तेरे जाने का वापस न आने का,,

टूटा दिल लेकर रोया करता था और तू अपने अमीरी का दिखावा करती थी,
अक्सर रोता था मैं और तू मुस्कुराया करती थी।।


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