आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Fauji ki chutti

मेरे अल्फाज़

फ़ौजी की छुट्टी

UTTARAKHAND TALKIES

7 कविताएं

240 Views
ना जाने क्या वक्त की फितरत सी हो गई
कि चंद दिनों में मेरी छुट्टी पूरी हो गई
कि अभी तो ना मां के आंचल में सोया था
कि अभी तो ना दिलरुबा के काजल में खोया था
कि अभी तो ना भाई बहनों से बात हुई थी
कि अभी तो ना गाव गलियों से मुलाकात हुई थी ।
ना जाने क्या वक्त की.......

कि अभी तो ना छलकाए थे दोस्तों के साथ जाम
कि अभी तो ना पूरे हुए थे मेरे घर के कई काम
कि अभी तो ना पापा के साथ
खेत खलियानों में जाना हुआ था
कि अभी तो मेरे घर में
मेहमानों का आना हुआ था
ना जाने क्या वक्त की......

अब जा रहा हूं तो कुछ छूट रहा है
जैसे मेरे अंदर कुछ टूट रहा है
मां से फ़िर झूठा ये दावा कर रहा हूं
मत रोना मां दिवाली पे लौटूंगा
ये वादा कर रहा हूं
ना जाने क्या वक्त की.....

पता नहीं कब फ़िर छुट्टी आना होगा
समझाता हूं मैं फ़िर ख़ुद को
भारत मां का लाल हूं
तेरी तो ड्यूटी है तुझे तो जाना होगा
ना जाने क्या वक्त कि फितरत सी हो गई
कि चंद दिनों मेरी छुट्टी पूरी हो गई
जय हिन्द जय भारत

- पूजा नेगी

-हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें। 
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!