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Meri chahat

मेरे अल्फाज़

मेरी चाहत

Utkarsh Dwivedi

8 कविताएं

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हर एक उंचाईं पर हमें अपने पैरों के निशान चाहिए,
या यूँ कहलो के हमे सारा का सारा आसमान चाहिए,
कुछ यूँ डटे रहो अपने सफर में तुम,
के जो देखे वो बोले इसे तो बस अपना मकाम चाहिए,
मैं नहीं लोग बताएँगे मेरी कहानी,
मुझे हर एक के ज़ुबान पर अपना नाम चाहिए,
जो कहानी बीच में छोड़ गई हो तुम,
मुझे उस कहानी का अंजाम चाहिए,
हर लड़ाई तेरी मैं शिद्दत से लड़ा,
तू भी याद रखना खुदा, मुझे मेरा इनाम चाहिए,
तुझसे अब प्यार की मांग नहीं करता मैं,
बस कभी कभी तेरे लबों पर अपना नाम चाहिए,
मेरी वफ़ा को तो खूब परखा तुमने,
अब मुझे भी तुम्हारे इश्क़ का इम्तेहान चाहिए,
जिनके कारण अलग हुए हम,
उन सब से मुझे अपना इन्तेक़ाम चाहिए,
रक़ीब से कहना की आएँगे हम तेरी शादी में,
पर मुझे मेरा अलग इंतज़ाम चाहिए।।

उत्कर्ष

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