कर्जा वापिस न करना

                
                                                             
                            हमारे नाम से सबको, नफरत क्यों है।
                                                                     
                            
लौटा दो जो बांकी, हिकमत क्यों है।।
वक्त पर काम आये, उसी को धोखा।
समझदारी में उनके, गफ़लत क्यों है।।
सब लेनदार मिलकर, इकट्ठा हो गये।
देनदारी नहीं करनी, वह गुप्त क्यों है।।
मन साफ नहीं, मिलकर क्या करोगे।
आस्तीन के सांप से, उल्फत क्यों है।।
कबसे फ़ितूर पाले, बैठे मेरे आशिक।
मोहब्बत निभाने में, नफरत क्यों है।।
मुझे उदासी पसन्द नहीं, अपनों की।
'उपदेश' से दूरी की, फ़ितरत क्यों है।।

उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद
 
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7 months ago

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