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मेरे अल्फाज़

दिल के अल्फाज़

Uday Rajpoot

3 कविताएं

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मैं अकिंचन साध्य हूँ
जिसको जरूरत आपकी 
साथ सबका ही मिला 
पर सादगी है आपकी 

देखता भँवरा कुसुम को 
ज्यों लताओं में उलझते
खुद भी जाता है उलझ 
यों प्रीति का सम्मान करते 

चाहो जो देना हमें 
एक कोंना अपनी ज़िन्दगी का 
मैं भी उलझूँ बंधनों की
जंजीरों में आपकी 

मैं अकिंचन साध्य हूँ

आप कहीं जो पास होते
दिल को ये आभाष होता
गर कहीं जो दूर जाते
मिलने के सपने सजोता 

आपकी नजरें पड़ी 
सावन ज़माना हो गया
देखना कुछ और था
पर महरबानी आपकी 

मैं अकिंचन साध्य हूँ 
जिसको जरूरत आपकी 
साथ सबका ही मिला 
पर सादगी है आपकी 

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