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Chod Do

मेरे अल्फाज़

छोड़ दो

TUSHAR PANDEY

3 कविताएं

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पत्थरों से सर टकराना छोड़ दो,
कुछ लोगों को अब समझाना छोड़ दो।

ख़ुद कुछ कर न पाए, इल्ज़ाम हाथ की लकीरों पर,
बहुत हो चुका अब, तक़दीर का बहाना छोड़ दो।

कब से बैठे हो अच्छे वक़्त के इंतज़ार में तुम,
नहीं आ रहा है तो, वक़्त गंवाना छोड़ दो।

मेहनत करने से कामयाबी क़दम चूमेगी,
दिमाग को बेकार इधर-उधर दौड़ाना छोड़ दो।

ख़ुदा सब पर एक जैसा ही रहता है,
इंसा हूँ मैं तुम हिन्दू मुसलमान बनाना छोड़ दो।

अच्छी बात नहीं है, पीठ पीछे बुराई करना,
हौसला है तो मूँह पे बोलो, बड़बड़ाना छोड़ दो।

चलने से पहले गिरना पड़ेगा कई बार,
जिओ तो दिल से वर्ना ज़ीना छोड़ दो।

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