दर्द बड़े प्यारे हैं

                
                                                             
                            आज गीले मेरी पलकों के किनारे हैं,
                                                                     
                            
दर्द तूने दिए हैं, तो ये बड़े प्यारे हैं!!

तू ग़म न करना मेरी रुसवाई का,
यही दर्द मेरे जीने के सहारे हैं!!

तुझसे शिकस्त का हम क्या गम करते,
बस तेरी जीत के लिए हम हारे हैं!!

खतायें सारी हकों की अदायगी में हुई,
चाहने वाले तो और भी तेरे सारे हैं!!

कटी पतंग का भी कोई ठिकाना होता है,
हम तो बस भटकते हुए, बेघर बेचारे हैं!!

तू समंदर है, तो समाने निकले हम तुझी में,
ठोकरें हज़ार होगी, हम नदियों के जलधारें हैं!!

तुमेश पटले "सारथी"

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1 year ago
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