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मेरे अल्फाज़

प्रेमाकांक्षी

Tuhin Chauhan

6 कविताएं

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अश्रु जन्मा प्रेम
इन स्रावित दृगों से,
उर धरा को सींचती,
निर्बाध चितवन,
प्रेम के अस्तित्व की,
अभिव्यक्त भाषा,
मौन होकर शब्दों में,
है यद्यपि वाचाल अति,
हे संगिनी,आकांक्षी हूँ
मैं तुम्हारे स्नेह का,
अंक के सामीप्य का,
अधरों के स्पर्श का,
आत्मा को आत्मसात,
बाहों का बेसुध आलिंगन,
कामना मन काम की,
आकांक्षी रति काम का,
देह यह भौतिक परंतु
अनुभूति हो तुम दैवीय,
यौवन क्षणिक है ज्ञात पर,
तुम रूप अमृत शाश्वत,
इस मृत्युमय अभिशाप से
मुक्ति मुझे दो संगिनी,
है निवेदन हार्दिक,
अपना पिलाकर रूप अमृत
अमरत्व दो हे संगिनी,
है निमंत्रण प्रेम का,
नीरस मेरे एकांत का,
अपने स्नेह की धार से
सींचो धरा तुम प्रेम की,
वर्षा के अपना प्रेम तुम,
ऊष्मा स्पर्श से,
इस आत्मा,इस देह से,
दो नया जीवन मुझे हे संगिनी,
भरकर अपनी बाहों में
मुझे प्रेम दो हे संगिनी,
जीवन मुझे दो संगिनी।।

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