आपका शहर Close
Hindi News ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Benares a city of ancient art

मेरे अल्फाज़

बनारस एक कविता

Tuhin Banerjee

42 कविताएं

21 Views
बनारस एक कविता
बनारस की पावन हवा में सिमटी है एक नयी ओजस्वी सोच
ये है हमारे यहाँ की एक पावन सोच

बनारस के मृदुल भाषा में रम गया है बरसात का रंग
और इसकी पुरानी गलियों में है एक नयी सोच

बनारस की घाटों पर से गुजर रहा है एक महान नदी
जिसका नया तेवर देखकर कहा खो जा रहा है पावन मन

इस शहर के पुराने छतो में है एक नयी हवा
जब हम देखे आसमान में तो प्रफुल्लित हो जा ता है हमारा मन

रामनगर किला में जाकर शहर को देखने का अपना ही है मजा
सारनाथ के पावन पेड़ो को सोचकर शांत हो रहा है गौरान्वित मन

इस शहर की मधुर घंटियों को आकस्मिक और निरंतर सुनकर कुछ एक नया सोच रहा है मन

इसी कौशल वातावरण में जब बरस रहा है बारिश का बूँद एक नयी चेतना का अनुभव
हो रहा है अभी और अब


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
सर्वाधिक पढ़े गए
Top

Other Properties:

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Your Story has been saved!