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मेरे अल्फाज़

इश्क एक मजाक

Tikam Dewangan

4 कविताएं

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इश्क पर ऐतबार मत करना
ये मजाक है,
इसे मज़ाक की तरह रखना।

हंसना हंसाना दिल्लगी करना
इश्क हो जाए तो इलाज करना।
ये तो बस मज़ाक है,
इसे मज़ाक की तरह रखना।

जब कड़वाहट भी मीठा हो जाए
और जाम भी पानी बन जाए
तुम नशे में सो जाना।
पर इश्क पर ऐतबार मत करना
ये मज़ाक है
इसे मज़ाक की तरह रखना।

यादों की सारी पहेलियां
जब तस्वीर बन जाए
दिल के किसी कोने पर
गम भर जाए।
तुम जोरों से हंसना
सोचना यह मज़ाक था
इसे मज़ाक की तरह रखना।

सब खत्म होने पर
उसके दोबारा आने पर
तुम हंसना
उसकी बातों पर ऐतबार मत करना।
उसने मज़ाक किया था
इसे मज़ाक की तरह रखना।

मरते वक्त सब भूल जाना
बस हंसना याद रखना।
हंसना ही तो इश्क़ था
इसे मज़ाक मत समझना।

✍ टीकम (अबराम)

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