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मेरे अल्फाज़

ये नींद बड़ी कमाल की है

The Sachin

17 कविताएं

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ये नींद भी बड़ी कमाल की है.
1. बिस्तर चाहे सोने का हो
कभी कभार नींद नहीं आती
बेशक नीचे घास हो
सोना तो सोना हुआ
बस ये नींद बड़ी कमाल की है
जहाँ थक लगती है वहीँ सुला देती है
2. मेरे दिन के हिसाबों को बखूबी
याद रखती है जो वक्त बर्बाद किया
तो सोने ही नहीं देती
अगर ईमानदारी से जिया
हलके से सुला देती है अपनी गोद में
3. रात हो दिन हो फर्क नहीं पड़ता
बस शरीर के इशारों को समझ
लेती है ये नींद भी बड़ी कमाल
की है साहब आसमाँ से पटककर
जमीन पर सुला देती है
4. हज़ारों लाखों जख्मों को भी
कुछ वक्त के लिये पी जाती है
ये नींद बड़ी कमाल की है
मेरे सपनों को पनाह दे जाती है
माँ मुझे लोरियां सुनाती और
नींद धीमे से सुला देती है ।



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