आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Unke paas vakt nahi

मेरे अल्फाज़

उनके पास वक्त नहीं

The Sachin

17 कविताएं

51 Views
Unke paas vakt nahi.
1. मेरी बातों का सिलसिला तब
शुरू होता है जब वो कहते हैं
मेरे पास वक्त नहीं
खूब सुनते हैं वो हर किसी की
खूब चाहते हैं वो हर किसी को
बात जब हमारी हो टाल देते हैं
उस कल पे जिसका कुछ पता नहीं
2. ऐसा नहीं की मुझसे नफरत करते
हैं बस यूं ज़माने के सामने अंजान
होने का ढोंग करते हैं
मुझसे जताते हैं के हम ख़ास
याद करते हैं तुम्हें
पीठ पीछे इतनी तारीफ करते हैं
और हमसे झूठ बोलते हैं
3. बताने को बहुत कुछ था
शायद मैैैंने देरी कर दी थी
काफी पलों से खामोश था
बस अल्फ़ाज़ों को होंठों तक
लाने में असफल हो गया
लेकिन क्या करें,
मेरी बातों का सिलसिला ही तब
शुरू होता है जब वो कहते हैं
मेरे पास वक्त नहीं ।

Sachin Kumar


हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
 
सर्वाधिक पढ़े गए
Top

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Your Story has been saved!