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मेरे अल्फाज़

मन की बात

The Kavisha

6 कविताएं

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कुछ लिखा फिर मिटा दिया
जाने क्या उसने छिप्पा दिया

ढूंढ रहा हूँ मैं भी हुनर जीने का
अब तक जो वक़्त था सब गवा दिया

मेरे दर्द कुछ लग रहे है अब अच्छे से
जो याद आ रहे थे उन्हें भुला दिया

अफसोस नहीं है मुझे अपने हालात पे
अपनो ने सपने मुकम्मल किए, अपनों के लिए मैंने सपना जला दिया

जिन्हें गुरूर था अपने अपने मकान पे 'ऐ दीप'
एक तूफान ने सारे मकान की बुनियाद, जड़ से हिला दिया

- दीपराज वर्मा (मुंबई)

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