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Question

मेरे अल्फाज़

प्रश्न

Thakur S

17 कविताएं

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क्या होती मन की पीड़ा, कैसे तुमको दिखलाऊँ मैं,
सूर्य तप्त हो उठा प्रिय, कैसे कोई दीप
जलाऊँ मैं,

जीवन का श्रृंगार बने हो,
हृदय का तुम आधार बने हो,
शून्य गगन से इस भूमि तक,
वर्षा की बौछार बने हो,

रंगयुक्त कर दे जीवन, कैसे वो इन्द्रधनुष बन जाऊँ मैं,
सूर्य तप्त हो उठा प्रिय, कैसे कोई दीप जलाऊँ मैं।।

कुछ आशाएं सीमित हैं,
श्वासों की डोर असीमित है,
जिस पंक्ति में हूँ बैठी,
वह तुम तक परिसीमित है,

जीवन के आयाम नये, कैसे खुद को समझाऊँ मैं,
सूर्य तप्त हो उठा प्रिय, कैसे कोई दीप जलाऊँ मैं।।

-समीक्षा ठाकुर

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