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Gazal : Gali Gali Neta ghane

मेरे अल्फाज़

ग़ज़ल : गली-गली नेता धने

Tejpal Singh

47 कविताएं

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गली-गली नेता धने, गली-गली हड़ताल,
संसद जैसे बन गई, तुगलक की घुड़साल।

नेता ही डाकू यहाँ, हैं नेता ही सरपंच,
प्रभु की करनी की कहो, कौन करे पड़ताल।

कौले-कौले बाज हैं, आँगन-आँगन काग,
कोयलिया ओझल हुई, बिगड़ गया सुरताल।

आँखन-आँखन भूख है, हाथन-हाथन खाज,
सत्ता के हाथों हुई कैद मगर टकसाल।

राजा बहरा हो गया, जनता हो गई मौन,
'तेज’ निरर्थक भीड़ में बजा रहा खड़ताल।

तेजपाल सिंह 'तेज'

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