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मेरे अल्फाज़

मैं लिखना चाहती हूँ

Tanu singh

1 कविता

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मैं लिखना चाहती हूं
उन अहसासों को जो मेरे
ज़हन में घर कर जाते हैं।
गरीबी से पड़ी वो शिकस्त
मासूम चहेरों पर दे जाते हैं
मायूस मां की आंखों में,
जो आंसू भर जाते हैं।
पढ़ें-लिखें होकर भी,
जो दर-ब-दर भटकने को
मजबूर हो जाते हैं।
कंधा बनने की बारी उन की थी
मगर उस लाल को ही अग्नि
देने वो जाते हैं,
जो मजबूरियों में कुछ ऐसे
फर्ज निभाते हैं।
मैं लिखना चाहती हूं
उन अहसासों को,
उस बिना लाठी के
लाचार बुढ़ापे को।।


-- तनु सिंह


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