आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   mere pranpriye
mere pranpriye

मेरे अल्फाज़

मेरे प्राणप्रिये

SWAPAN KARMAKAR

8 कविताएं

86 Views
मैं जब भी सोचूं, कल्पना सी
मेरे आंगन के अल्पना सी
तुम सजती हो मेरे द्धार प्रिये|
गंगा सी शीतल बनकर तुम
रति का श्रृंगार बनकर तुम
मन मेरा लेती हो मोह प्रिये|

किसी जलधारा सी बहती बहकर
कभी पर्वत सी अविचल होकर
मेरा हर दुःख हर लेती हो|
सौंदर्य अतुल्य तुम्हारा है
मैं अदना सा प्रेम गीत हूँ
तुम प्रेम का सागर विशाल प्रिये|

तुम निरस्त के बादल में
हो मेरी वही जल कि शीतल एक बूँद प्रिये
राधे-मोहन कि रासलीला सी
हो ऐसा तुम श्रृंगार प्रिये
तुम सुंदरबन के आहट सी
तुम उन्मुक्त गगन का राग प्रिये
केवल तुम्हीं हो मेरे प्राणप्रिये |

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
Comments
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!