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मेरे अल्फाज़

मेरे प्राणप्रिये

SWAPAN KARMAKAR

8 कविताएं

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मैं जब भी सोचूं, कल्पना सी
मेरे आंगन के अल्पना सी
तुम सजती हो मेरे द्धार प्रिये|
गंगा सी शीतल बनकर तुम
रति का श्रृंगार बनकर तुम
मन मेरा लेती हो मोह प्रिये|

किसी जलधारा सी बहती बहकर
कभी पर्वत सी अविचल होकर
मेरा हर दुःख हर लेती हो|
सौंदर्य अतुल्य तुम्हारा है
मैं अदना सा प्रेम गीत हूँ
तुम प्रेम का सागर विशाल प्रिये|

तुम निरस्त के बादल में
हो मेरी वही जल कि शीतल एक बूँद प्रिये
राधे-मोहन कि रासलीला सी
हो ऐसा तुम श्रृंगार प्रिये
तुम सुंदरबन के आहट सी
तुम उन्मुक्त गगन का राग प्रिये
केवल तुम्हीं हो मेरे प्राणप्रिये |

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