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मेरे अल्फाज़

चुभन

Sushma Nayyar

13 कविताएं

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चुभन सीने की अश्क बनकर
सज गई है आंखों में,
अल्फ़ाज़ हैं परेशां
क्या बतलाए बातों में।

कतरा ये खारे पानी का
समन्दर से भी गहरा है,
ये आंखों से बोलता है
अल्फाजों पर पहरा है।

नासाज़ हुए साज सारे
दिल आज परेशां है,
यह कैसी है चुभन
दिल बहुत हैरां है ।।

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