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मेरे अल्फाज़

लौट आओ आज बापू

Sushil Sharma

196 कविताएं

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आज बापू तुम कहाँ हो
इस कठिन से दौर में।
ढूँढ़ता है देश तुमको
हो कहाँ किस ठौर में।

तुम कहाँ बैठे अकेले
लौट आओ इस तरफ।
है विकट संघर्ष बेला
जहाँ देखो जिस तरफ।
सत्य सूली पर टँगा है
झूठ के हैं कहकहे।
हर तरफ है शोर भारी
गूँजते स्वर मन कहे।

प्रेम के रिश्ते सिसकते
स्वार्थ के मन मौर में।

विश्व में संघर्ष जारी
मौत के हैं जलजले।
आग के दामन में बैठे
चीन पाकी मनचले।
आज है तेरी जरूरत
इस चटकते विश्व को।
बापू तुम ही संभालो
इस भटकते अश्व को।

लौट आओ आज बापू
इस चमन के पौर में।

है जरूरत आज उनकी
जो वतन के पुत्र हैं।
शुद्ध जिनके मन वचन है
देश के जो मित्र हैं।
प्रेम अहिंसा मन में हो
देश पर अभिमान हो।
गाँधीवादी आचरण हो
सत्य का संधान हो।

दीप आशा के जलाओ
घन तमस के दौर में।

- डॉ सुशील शर्मा

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