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मेरे अल्फाज़

इक प्यार का नगमा है

sushil pandey

22 कविताएं

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यह अमर तिरंगा है, वीरों की निशानी है,
याद करके उन्हें आया ,इन आँखों में पानी है - ये अमर
खाई गोली कितनी, पग रुकने दिया नहीं,
हो गए कलम ये सर, पर झुकने दिया नहीं
इसमे है सिंह भगत, झाँसी की रानी है, याद करके उन्हें आया -----
अर्पित है सुमन श्रद्धा, संगीत सुना करके,
तुम्हे जन गण मन वाला वो गीत सुना करके,
सब भेद भुलाना है, आवाज उठानी है,
याद करके उन्हें आया----
ना हिन्दू मुस्लिम हैं, ना काबा काशी है,
हम भारत वाले हैं, हम भारतवासी हैं
हर दिल में मुहब्बत की, इक ज्योति जलानी है,
याद करके उन्हें आया -----
यह अमर तिरंगा है, वीरों की निशानी है,
याद करके उन्हें आया, इन आँखों में पानी है -

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