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मेरे अल्फाज़

जब कभी भी तुझे मैं देखूँगा...

Sushil Kumar

19 कविताएं

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जब कभी भी तुझे मैं देखूँगा ,
तेरी आँखों में खो सा जाऊंगा !
चाँद -तारों की झलक पा इनमें ,
मुस्कराऊंगा, बहक जाऊंगा !!

सुर्ख होंठों की चमक बिखरेगी,
तेरे यौवन की छटा थिरकेगी !
तेरे मासूम से इस चेहरे पर,
मैं बहारों का नशा पाऊँगा !!

जुल्फ लहराएगी, बल खाएगी,
दिल का सब चैन सा ले जाएगी !
इन घटाओं में बिजलियाँ तकता ,
तेरी खुश्बू में खो सा जाऊंगा !!

तू ज़मीन पे ,कदम जो रखे हैं,
यों लगे, ज्यों घटाएं, उमड़ी हों !
तेरी यौवन से लदी डाली को ,
मैं ज़मीन पे झुकी सी देखूंगा !!

तुम जो शरमा के मुंह छुपा लोगी,
यों लगेगा की चाँद शरमाया !
जा छुपा हो ये जैसे बादल में ,
झांकता मन्द-मन्द मुस्काता !!
उसमें तेरी हया मैं देखूंगा ,
शोखियाँ सी, मचलती देखूंगा .......

रचयिता : सुशील कुमार जैन , 21 जुलाई 2011, 8.00 बजे सुबह, दोहा - क़तर

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