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मेरे अल्फाज़

सफर...

Susheel Tiwari

3 कविताएं

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सफ़र सफ़र चला हूँ मैं,
क़दम क़दम को नापते,
गली गली मिली मुड़ी ,
मुड़े मुड़े से रास्ते।

वो बूँद बूँद प्यास जो,
गगन गगन तलाशते,
चमन चमन फिरा किए,
कली कली निहारते।

लहर लहर बिछड़ गई,
वो संग संग नाचते,
तड़प तड़प उठी धरा,
पवन पवन पुकारते।

वो फूल फूल खो गई ,
हैं रंग रंग तितलियाँ,
वो स्वप्न स्वप्न सो गये,
निशा निशा मे जागते।

नयन नयन हँसी ,हँसी,
पलक पलक पसारते,
खिली खिली फिजाँ मिली,
बदन-बदन तराशते।।

सुशील चन्द्र तिवारी
कानपुर

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