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मेरे अल्फाज़

लव आकाश...

suryakant nirala

24 कविताएं

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जमीं से ऊपर आकाश नजर आया
चारों तरफ है उसी का साया ,
अपनी बाहों के आगोश से
चारो तरफ है अपना पहरा गिराया।

हवाओं का हुक्म पाकर,
निले गगन घन मेघा छाया,
कहीं पर धूप कहीं पर छाया
कहीं दुःख कहीं सुख का वर्षा बरसाया।

नीर गगन मेघा संघ चहुंओर रंग बरसाया,
निकला सारंग ढल गया,
रात तारों से सजाया,
कितने छूटे इसके नीचे अपना और पराया।

मेघा को डराया चंचला को बरसाया,
घटा छेड़ मोरनी को ललचाया,
गर्भ में अपने ग्रहों को छुपाया,
यही गगन कि महिमा-माया,
जमीं से उपर आकाश नजर आया।

- सूर्यकांत 'निराला'

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