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मेरे अल्फाज़

अपना मुंह जलाया न करो

Suryakant Bharati

4 कविताएं

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अपना मुंह जलाया न करो ,
कड़ी धूप में यूं ही जाया न करो ।

वो सितमगर हैं ये समझ लो ,
उनसे नजरें मिलाया न करो ।

जिगर चाक कर रख देगी वो ,
तपाक से हाथ मिलाया न करो ।

अपनी ही बस्ती में घूमो फिरो ,
औरों की गली में जाया न करो ।

तेरी तबीयत नही है अभी अच्छी ,
पहली बारिश में नहाया न करो ।

- सूर्यकांत भारती

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