आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Mehnat ka parinam

मेरे अल्फाज़

मेहनत का परिणाम

Surjit man

14 कविताएं

42 Views
मिलकर ही रहता है इक दिन
मेहनत का परिणाम।
थकन ओढ़कर मत बैठो तुम
अन्त नहीं विश्राम।

देख विवशताओं को द्वारे
फूट फूट मत रोना।
बार-बार पाकर भी खोना
क्या पाना क्या खोना?
जब तक चलती स्वांस डोर है
तब तक चलता काम।
थकन ओढ़कर मत बैठो तुम
अन्त नहीं विश्राम।

नित-नित नई समस्याओं से
टकराना पड़ता है।
छाले कितने पड़े पाँव में
चलना ही पड़ता है।
जीवन भी एक दर्शन जैसा
जैसे चारों धाम।
थकन ओढ़कर मत बैठो तुम
अन्त नहीं विश्राम।

राहों को क्यों देख रहे हो?
दूरी से क्या लेना?
मन में अगर ठान लोगे तो
सीखोगे तुम देना।
श्रम का हम को महत्व बताने
वन को जाते राम।
थकन ओढ़कर मत बैठो तुम
अन्त नहीं विश्राम।

सुरजीत मान जलईया सिंह


हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
 
सर्वाधिक पढ़े गए
Top

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Your Story has been saved!