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मेरे अल्फाज़

चांंद

Surjit man

14 कविताएं

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घटाओं पर हुकूमत कर जबाबी हो गया चन्दा।
तुम्हारा अर्ध्य पाकर के नवाबी हो गया चन्दा।
तुमने छलनी से ही दीदार को चेहरा उठाया था।
तुम्हारी आँखों में उतरा शराबी हो गया चन्दा।

सुरजीत मान जलईया सिंह


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