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मेरे अल्फाज़

दुर्भाग्य तुम्हारा ये है

Surendra Ngr

12 कविताएं

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दुर्भाग्य तुम्हारा ये है नायक, सबका साथ नहीं ले पाते
और तुम्हारे दिव्य-दर्प से, रिपु-दलम सब भय खाते 

लाख करो तुम मन की बातें, आशंकित दिल क्यों मानेगा
और तुम्हारे वक्ष-स्थल पर, प्रतिपक्ष तीर सदा तानेगा 

राजपथ के राजपथिक हो, सबको विकसित करना होगा
कोई लाख मलानत भेजे तुमको, सबको लेकर चलना होगा 

-सुरेंद्र गायकी/औरंगाबाद

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