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मेरे अल्फाज़

मां

Sunita Yadav

14 कविताएं

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लडके की शादी की तैयारी,सर पर आया कारज भारी।
नेक सलाह हर पल दे मुझको,मां दे दो कोई आज उधारी।
पकड अगुंली जिसकी मैने,पग घरती पर रखना सीखा।
जिसके आंचल की छाया में,शब्द वो पहला कहना सीखा।
मुझको अपना सब कुछ देकर,चली गई वो पालनहारी।
नेक सलाह हर पल दे मुझको,मां दे दो कोई आज उधारी।

जब भी काम किया मैने,मां तेरी याद बहुत आई।
तुझको खोकर सबकुछ खोया,हो ना सकी है भरपाई।
तू थी जब तक पास मेरे,मै चिन्ता से मुक्त रहा।
किसी तरह का भय नही था,सदा सर पर तेरा हस्त रहा।
तेरे बिना मै आज अधूरा,कम पड जाती हर होशियारी ।
नेक सलाह हर पल दे मुझको,मां दे दो कोई आज उधारी।

पर तू तो हर पल साथ है मेरे,सब कुछ तेरा कृपा फल है।
तेरा वरद हस्त है सर पर,मेरा जीवन हुआ सफल है।
मां होती ईश्वर की मूरत,उसकी महिमा जग मे न्यारी।
नेक सलाह हर पल दे मुझको,मां दे दो कोई आज उधारी।

(जग की समस्त माताओं को नमन)

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