बस चला चल

                
                                                             
                            भोर की किरण
                                                                     
                            
कह रही
रात खतम
उठ चल,पहन
खूँटी पर टँगी
तेरी कूली की वर्दी
दूध नहीं तो आटा घोल
पी ले आज थोड़ा ज्यादा
देनी है फीस मुन्ने की
जिद्द पूरी करनी आज तो
ला गुडिया मुन्नी की
बचा तैल है जो थोड़ा
मल डाल हाथ पाँवों पर
फेरे लगाने ज्यादा दो-चार
जोड़ हाथ मालिक को
बस चला चल
मिल जाए आज ज्यादा
प्रबल भाग्य और कमजोर काँधों वाले
कर प्रार्थना यही
तब तक ना ढ़ले शाम
जब तक ना कर सके पूरी
मुन्ना मुन्नी की उम्मीद

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3 years ago

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