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मेरे अल्फाज़

एक तरफा या दो तरफा

Sumit Kumar

2 कविताएं

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मुहब्बत एक तरफा है
तो एक तरफा रहने दो जनाब,
कहीं दो तरफा मुहब्बत की आस में
एक तरफा नफ़रत के भागीदार
न बन जायें.....

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