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मेरे अल्फाज़

आज मेरे अरमानों की शादी है

Sumit Kumar

2 कविताएं

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आज मेरे अरमानों की शादी है
खुशियाँ बारात लेकर तैयार बैठी,
तो गम बिन बुलाये रिस्तेदारों
की तरह मुरझाये पड़े हैं।

सौगातों की बरसात हो रही है
तो कहीं बिन तेल गुलगुले पके,
न जाने केसी दुविधा में फंसी
ये मेरे अरमानों की शादी है।

-सुमित बैनीवाल
Rj-31 वाला

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