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मेरे अल्फाज़

अफ़वाहों से हमें ना डराओ

Suman Zaniyan

2 कविताएं

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करनी है तो बेशक करो रुसवाई
पर अफवाहों से हमें ना डराओ
चल रहे ख्वाहिशों में तुझे लेकर
समझ हमारी ज़रूरत खुद को
तुम खुद में मत इतराओ

ना करो चेहरों पर ऐतबार
ना हालात को दीवार बनाओ
सही रुसवाई, सह लिया जो दी चुभन तुमने
हो सके तो आख़िरी दफा खुद का दीदार कराओ

देखो सज चुकी बाजार मोहब्बत की
चाहो तो हमें भी नीलाम कराओ
करनी है तो बेशक करो रुसवाई
पर अफवाहों से हमे ना डराओ

ना तरपाओ यू मीठे टीस से हमें
कहीं कर बैठे ना हम भी तुझसे तुझसा बेवफाई
सजदे में तेरे झुककर कहता हूँ तुझसे
ना हो नुमाइश मोहब्बत की कोई ऐसी सजा बताओ
करनी है तो बेशक करो रुसवाई
पर अफवाहों से हमें ना डराओ 

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