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मेरे अल्फाज़

दोस्ती के मायने

Suman Joshi

4 कविताएं

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दोस्ती के मायने उनसे पूछो,
जिसने दिया है कन्धा अपने जिगरी को 
सरहद के उस पार से इस पार।

दोस्ती के मायने उनसे पूछो,
जो पथरीले रास्तों में कंकड़ों के बीच
बनते हैं मरहम हर बार।

दोस्ती के मायने उनसे पूछो,
जिसकी शक्कर की मुस्कान के लिए
उसने थाम दिया हो आसुओं का सैलाब।

दोस्ती के मायने उनसे पूछो,
जो भरा हो भकार भर सवालों से
और दोस्त पूछे तो कहे खुश हूँ यार।

दोस्ती के मायने उनसे पूछो,
जो जानते हो तस्वीर में नहीं तकलीफ़ में खड़ा होना
जिसकी सुगंध हो किताबों में पड़े फूलों की तरह।

दोस्ती के मायने उनसे पूछो,
जिसने भिगोई हो पलकें बिन मौसम की बरसात में
अपने दोस्त के छूने पर आसमान।

दोस्ती के मायने उनसे पूछो,
जिसने की न कभी तुलना हीरे या कोयले में
जो दो ग़ज के कमरे में भी कराये जन्नत का एहसास।

दोस्ती के मायने उनसे पूछो,
जिसने पिया हो समंदर आपके साथ
और बाँटी हो गुल्लक भर खुशियाँ कई बार।

दोस्ती के मायने उनसे पूछो,
जिसने बैसाखी न दी, दौड़ना सिखाया हो
आँखों में जो देखे और जानता हो आपके पंखों की उड़ान।

दोस्ती के मायने उनसे पूछो,
जो गढ़ न पाया हो कोई कविता आपके लिए
पर बातों-बातों में ले जाता हो आपको सपनों के पार।

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